सपा के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने शनिवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए विभिन्न राज्यों में एसआईआर के जरिये 13 करोड़ लोगों को मताधिकार से वंचित कर दिया है। इसका खुलासा हाल ही में हुआ है। भाजपा सरकार की नीतियों से नाराज जेनजी को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।
यूपी के देवरिया में शहर के राघव नगर स्थित एक रेस्टोरेंट में पूर्व विधायक पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह बात साफ तौर से उजागर हुई है कि विगत दस महीनों में दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चौदह बार आपत्तियां दर्ज कराई है। उनकी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए एसआईआर से संबंधित सभी फैसले मनमाने तरीके से ज्ञानेश कुमार ने लिया। फार्म छह के जरिये 18 साल की आयु पूरी करने वाले नौजवानों को साजिशतन मतदाता बनने से रोका गया, क्योंकि फार्म छह में दोनों चुनाव आयुक्तों की इस आपत्ति के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने व्यक्तिगत अपने फैसले से यह शर्त लगा दिया कि नए मतदाता फार्म में पिछले वोटर लिस्ट में उनके माता-पिता का नाम यदि है तो ही नए मतदाता बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का काम है कि अधिक से अधिक मतदान कराकर संविधान की रक्षा करना। पहली बार इस देश में हो रहा है कि चुनाव आयोग खुद ही 13 करोड़ लोगों को मतदान करने से वंचित कर दिया है। यह केवल बड़े पैमाने पर इस देश में नये मतदाताओं को मतदान से रोकने साजिश है। बड़े पैमाने पर फार्म सात के जरिये लोगों का नाम काटने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपीलें दाखिल की गई हैं, लेकिन इसकी जानकारी दोनों चुनाव आयुक्तों को नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उनके विरुद्ध केस दर्ज होना चाहिए। साथ ही एसआईआर के बाद जिन प्रदेशों में चुनाव हुए हैं, वहां की मतदाता सूची ठीक कराते हुए वहां पुन: चुनाव कराया जाना चाहिए।








